Skip to main content

वियतनाम में मिला 1100 साल पुराना शिवलिंग

वियतनाम में एक मंदिर की खुदाई के दौरान मिला 1100 साल पुराना शिवलिंग -


वियतनाम में एक मंदिर की खुदाई के दौरान मिला 1100 साल पुराना शिवलिंग

साउथ ईस्ट एशिया का छोटा-सा खूबसूरत और शांत देश है-वियतनाम। वियतनाम और भारत के बीच सांस्कृतिक संबंध काफी पुराने हैं।  हाल में वियतनाम में बलुआ पत्थर का विशाल शिवलिंग खुदाई में मिला है। इस शिवलिंग के मिलने की जानकारी भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर तस्वीरों के साथ शेयर की हैं।
सा_प्रथमा_संस्कृति:_विश्ववारा ...
इस खोज पर एएसआई की प्रशंसा करते हुए, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा कि 9वीं शताब्दी का अखंड बलुआ पत्थर शिवलिंग वियतनाम के मई सन मंदिर परिसर में जारी संरक्षण परियोजना की नवीनतम खोज है। एएसआई की टीम को बधाई ।’
shivaling in vietnam temple: वियतनाम में एक मंदिर ...

Comments

Popular posts from this blog

UN सैन्य जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवार्ड

UN सैन्य जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवार्ड से सम्मानित हुई भारत की महिला मेजर सुमन गवानी  UN सैन्य मिलिट्री  एडवाकेट ऑफ़ द ईयर अवार्ड जितने वाली पहली भारतीय महिला सुमन गवानी बन गई है ,जो भारत के उत्तराखंड राज्य  से है।  भारत और उत्तराखंड वालो के लिए ये एक गौरव की बात है।  सयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत सुमन गवानी को साउथ सूडान में तैनात किया गया था   2016 में इस अवार्ड की शुरुआत की गई थी।  यह पुरस्कार शांति अभियानों में प्रमुखों और फोर्स कमांडरों द्वारा नामित महिलाओं के संयुक्त राष्ट्र सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत सैन्य शांति सैनिकों के समर्पण और प्रयास का सम्मान करता है।

मछली उद्पादक में तमिलनाडू शीर्ष पर

वार्षिक CMFRI  रिपोर्ट के अनुसार  मछली उद्पादक में तमिलनाडू शीर्ष पर रहा है।  Add caption

भारत की जिलोमोल मैरियट थॉमस बिना हाथो के कार चलाने वाली एशिया की पहली महिला

भारत की जिलोमोल मैरियट थॉमस  बिना हाथो के कार चलाने वाली एशिया की पहली महिला बा नी - जिलोमोल मैरियट थॉमस  इनकी आयु 28 वर्ष की है| ये भारत के केरल से है| वैसे विश्व भर में बहुत सारे लोग बिना हाथो के ड्राइविंग करते है | ये बचपन से ही बिना हाथो के पैदा हुई इनकी इस दुर्लभता का कारण  थैलिडोमाइड सिंड्रोम नाम की बीमारी के कारण हुई ये बचपन से ही अपने पेरो से कार चलना सीख गई थी| पर  इने लाइसेंस एजेंसी द्वारा डाइविंग लाइसेंस नहीं पा रहा था|लाइसेंस एजेंसी द्वारा इनसे कहा गया की कोई और व्यक्ति  है,जो तुम्हारी तरह हो पेरो से ड्राइविंग  करता हो,और उसे लाइसेंस एजेंसी ने लाइसेंस प्रोवाइड कराया हो| तब उन्होंने  एक  पहले व्यक्ति को खोज निकाला जिनके हाथ ना  होते हुए भी उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया गया था। उनका नाम विक्रम अग्निहोत्री है। फिर भी उने  लाइसेंस नहीं दिया गया|इसके बाद उन्होंने 2018 में हाईकोर्ट के दरवजे खट-खटये, फिर उने  केंद्र सरकार के नोट  पर डाइविंग लाइसेंस जारी किया गया | आप इन फोटो की मदद से देख सकत...